साहीवाल
दोसर नाँव: Lambi Bar, Montgomery, Lola
भारत की सर्वोत्तम देसी डेयरी नस्ल मानी जाती है। एशिया और अफ़्रीका में स्थानीय गायों का सुधार करने के लिए साहीवाल का उपयोग होता है, क्योंकि यह अधिक दूध के साथ उष्ण जलवायु सहने की क्षमता भी रखती है।
SAHIWAL
शारीरिक विशेषता
- रंग: लालिमा लिए भूरा से हल्का लाल, कभी-कभी सफ़ेद धब्बों के साथ
- ढीली, मुलायम त्वचा; भारी गलकंबल और बड़ा शीथ
- भारी शरीर, छोटे पैर और ठिगना रूप
- सींग छोटे और मोटे; मादाओं में अक्सर ढीले सींग
- शांत, सुस्त स्वभाव — संभालने में आसान
किसान खातिर फायदा
गाँव की परिस्थितियों में देसी नस्लों में सबसे अधिक दूध उत्पादन
चिचड़ी, परजीवी और उष्णकटिबंधीय रोगों से मज़बूत प्रतिरोध
उष्ण जलवायु की डेयरी के लिए दुनिया भर में संकरण में उपयोग
साधारण हरे चारे और फ़सल अवशेष पर भी उत्पादन बनाए रखती है
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नस्ल के परिचय
- जानवर के किसिम
- गाय
- उपयोग
- दूध
- मूल इलाका
- फ़ाज़िल्का और फ़िरोज़पुर ज़िले; मूल रूप से मोंटगोमरी क्षेत्र
- कहाँ पाईल जाला
- पंजाब हरियाणा राजस्थान
- उत्पादन
- प्रति ब्यांत 2,000–3,000 किलो; वसा 4.5%
दोसर गाय के नस्ल
THARPARKAR
दुनू काम खातिर
थारपारकर
राजस्थान, गुजरात
A dual-purpose desert breed that gives useful milk while producing strong draught bullocks. It survives on sparse desert grazing and scarce water.
1,200–2,500 kg per lactation; 4.9% fat
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ONGOLE
दुनू काम खातिर
ओंगोल
आंध्र प्रदेश
A large, majestic white breed known for muscular strength and a proud carriage. Ongole is the ancestor of the American Brahman and is prized across Latin America.
600–1,500 kg per lactation; 4.8% fat
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GIR COW
दूध
गिर
गुजरात
भारत की सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्लों में से एक और सबसे अधिक निर्यात की गई देसी गाय। ब्राज़ील के डेयरी उद्योग की नींव गिर पर ही टिकी है, जहाँ चुनिंदा गिर गायें अब एक ब्यांत में 10,000 किलो से अधिक दूध देती हैं।
प्रति ब्यांत 1,600–2,500 किलो; वसा 4.5–5%
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